
शिमला। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के 101वें वर्ष और विजयदशमी के अवसर पर आज शिमला के नया शिमला नगर में राष्ट्रीय स्वयंसवेक संघ द्वारा पथ संचलन व नगर एकत्रीकरण कार्यक्रम का आयोजन किया। राष्ट्रीय स्वयंसेवको ने पारंपरिक गणवेश, घोष वादन और शस्त्र पूजन के साथ भव्य पथ संचलन निकाला गया।
स्वयंसेवकों ने सेक्टर -3 से तारा माता मंदिर तक
बैंड की धुनों के बीच अनुशासित तरीके से मार्च किया। कार्यक्रम में संघ के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने भाग लिया। इसमें छोटे बच्चे भी शामिल रहे। जिसका स्थानीय लोगों ने पुष्प वर्षा कर स्वयंसेवकों का स्वागत किया।

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता विभाग सह कार्यवाह
बलवंत सदरेट ने कहा कि समाज में जाति, वर्ग और अन्य भेदभावों से ऊपर उठकर आपसी भाईचारे, सहयोग और समरसता की भावना को मजबूत करना समय की आवश्यकता है। समाज के प्रत्येक व्यक्ति को राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखते हुए सकारात्मक भूमिका निभानी चाहिए। उन्होंने सेवा, संस्कार और राष्ट्रभक्ति के मूल्यों को जन-जन तक पहुंचाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि समाज की एकता और सामूहिक प्रयासों से ही सशक्त राष्ट्र का निर्माण संभव है। उन्होंने कार्यक्रम में उपस्थित स्वयंसेवकों ने सामाजिक सद्भाव बनाए रखने, समाज के सभी वर्गों को साथ लेकर चलने तथा राष्ट्र निर्माण के कार्यों में सक्रिय योगदान देने का संकल्प लिया।

इससे पूर्व कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए डॉ सत्येंद्र सिंह मिन्हास ने स्वयंसेवकों और उपस्थित लोगों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि विजयदशमी असत्य पर सत्य की जीत, अहंकार पर विनय की जीत और शक्ति की अराधना का पर्व है। उन्होंने कहा कि आज ही के दिन वर्ष 1925 में डॉ. बलिराम हेडगेवार ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना की थी। इस उपलक्ष्य पर नगर के माननीय संघ चालक महेंद्र काल्टा जी भी उपस्थित रहे।
