15वें वित्त आयोग में हिमाचल का जो पक्ष रखा था हम आज भी उस पर कायम है : जयराम ठाकुर

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शिमला : पूर्व मुख्यमंत्री नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने विधानसभा सत्र के समापन के बाद मीडिया के प्रतिनिधियों से बात करते हुए कहा कि सदन में लगातार झूठ बोला जा रहा है। मुख्यमंत्री जवाब देते हुए लगातार गलत आंकड़े पढ़ रहे थे। उसका उत्तर देने के लिए हमने समय मांगा लेकिन हमें समय नहीं मिला। मजबूरन भारतीय जनता पार्टी के विधायक दल को वेल में आकर नारेबाजी करनी पड़ी लेकिन हमारा पक्ष नहीं सुना गया और मुख्यमंत्री के झूठ की धारा सदन में बहती रही। जबसे यह सत्र चला है सत्ता पक्ष से लगातार यह बात कही जा रही थी कि आ डीजी खैरात नहीं है अधिकार है।  विधायक ही नहीं मुख्यमंत्री भी लगातार गलत आंकड़े अलग–अलग तरीके से प्रस्तुत कर रहे हैं। मुख्यमंत्री वित्त विभाग की प्रेजेंटेशन से विपरीत आंकड़े दे रहे हैं। कितना झूठ सरकार में बैठे लोग बोल रहे हैं।

जयराम ठाकुर ने कहा कि 15 वें वित्त आयोग में हमारी सरकार द्वारा दी गई प्रेजेंटेशन लेकर आए थे। हमने जो बात सरकार में रहते हिमाचल के भले के लिए कर सकते थे किया। मुख्यमंत्री भी कह रहे थे कि आपने हिमाचल के हित के लिए 15वें वित्त आयोग में बहुत बढ़िया काम किया था। हमने काम किया, तर्कपूर्ण पक्ष रखे, हिमाचल की समस्याएं बताई, हर मंच पर हिमाचल की आवाज उठाई तो हमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वालीं केंद्र से मदद मिली। हम आज भी अपनी उस प्रेजेंटेशन पर कायम हैं। हिमाचल को यदि आज राजस्व घाटा अनुदान नहीं मिला तो उसके जिम्मेदार मुख्यमंत्री और सुक्खू सरकार है। हिमाचल के हितों की वह पैरवी नहीं कर पाए। भाजपा सदैव हिमाचल के हित के लिए लगातार तत्पर है। कांग्रेस की इस राजनीति से प्रदेश का नुकसान हो रहा है। सरकार को राजनीति से बाज आना चाहिए। सरकार की हठधर्मिता की वजह से प्रदेश का बहुत नुकसान हो रहा है।

पत्रकारों के सवाल के जवाब में नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि भाजपा लगातार हिमाचल के हितों की पैरवी केंद्र सरकार से करती रहती है। लेकिन मुख्यमंत्री हिमाचल के हितों की पैरवी के बजाय सिर्फ और सिर्फ राजनीतिक कर रहे हैं। भारतीय जनता पार्टी के विधायक कौन है नेता प्रतिपक्ष के नेतृत्व में विधानसभा सत्र के समापन के बाद  कांग्रेस सरकार की हिमाचल विद्युत नीतियों के विरुद्ध जमकरनारेबाजी की।  सभी विधायकों ने हिमाचल को बेचने,  हिमाचल के लोगों की सुविधाएं छीनने, झूठे आंकड़े पेश करने, सदन को गुमराह करने आरोप  लगाते हुए मुख्यमंत्री के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

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