FCA- 1980 में हिमाचल के साथ हुई नाइंसाफी, अपने अधिकारों के लिए जारी रहेगी लड़ाई- सिंघा

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शिमला || सुरजीत ठाकुर

हिमाचल प्रदेश में वन भूमि पर लगे सेब के पौधों को काटने के मामले में गतिरोध जारी है। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने हिमाचल हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी थी, जिसमें वन भूमि पर अवैध रूप से लगाए गए सेब के पेड़ों को काटने का निर्देश दिया गया था। किसान-बागवान संगठनों ने 29 जुलाई को सचिवालय घेराव के बाद सरकार के साथ बैठक की, जिसमें अपनी मांगों को रखा गया। बागवान नेता राकेश सिंघा ने कहा कि मामला केवल किसानों-बागवानों की बेदखली का नहीं है, बल्कि सरकार के पास भूमि वितरण के अधिकार का भी है। सिंघा ने कहा कि 1980 में वन संरक्षण कानून आने से हिमाचल के साथ नाइंसाफी हुई है और राज्य सरकार के पास भूमि वितरण करने का अधिकार होना चाहिए। अब किसान-बागवान संगठन 13 अगस्त को पूरे देश में मोर्चा खोलेंगे।

बागवान नेता राकेश सिंघा ने कहा कि राज्य सरकार के अनिश्चितकालीन आंदोलन को स्थगित करने के लिए हस्तक्षेप किया है। सरकार ने कहा है कि वह अतिक्रमण हटाने के साथ सेब की फसल की नीलामी के लिए भी समय देगी, जिससे किसानों को राहत मिल सके। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा है कि सरकार पेड़ काटने के पक्ष में नहीं हैं। राकेश सिंघा ने कहा है कि राज्य और केंद्र सरकार को बागवानों के मुद्दे पर ठोस कदम उठाने होंगे, वरना किसान-बागवान डटकर मुकाबला करेंगे।

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